Sunday, 23 June 2019

हिचकी एक प्रेम कथा

कॉलेज के उन दिनों की बात  है जब सारे दोस्त एक साथ क्लास बंक किया करते थे और कैंटीन के समोसे चटनी किसी अमृत से कम  नहीं लगते थे। कॉलेज के हर डिपार्टमेंट में पढाई कम  और गप्पे ज्यादा चलते थे।  लड़कियों के बिच लड़के और लडको  के बिच लडकिया ग्रुप की शान बढ़ाया करते थे।  हर क्लास के बाद सुट्टे पे सुट्टो का दौर और उस के बाद कोल्ड ड्रिंक्स की ठंढक और ऊपर से रजनीगंधा और तुलसी की मादक खुसबू से शाम जवान हुआ करती थी।  कौन अमीर  और कौन गरीब सब के बटुए एक साथ खुला करते थे साहब वो दौर ही अलग था।  कॉलेज के सीढ़ियों पे लगता था की पांच सितारा होटल फेल है।  इन सबके बिच हमारा जिगरी दोस्त राकेश एंट्री लेता है और यही से शुरुआत होती है एक अनोखी प्रेम कथा की।  फर्स्ट ईयर के एडमिशंस चल रहे थे और नए नए चेहरे कॉलेज की शान बढ़ा रहे थे।  तभी एंट्री होती है एक ऐसी लड़की की जो खूबसूरती के मामले में चाँद सितारे तक की गोटिया लाल कर दे। एक तरफ इंग्लिश ऑनर्स का थर्ड ईयर बैच और दूसरी तरफ फ्रेशर्स।   
 राकेश  हमारे ग्रुप का सबसे होनहार विद्यार्थी था और कॉलेज का पहला लौंडा था जिसने दोनों साल मिलाकर 60 % मार्क्स लाये थे।  अंग्रेजी साहित्य में नंबर लाना कोई मजाक नहीं था।  यह एक कारण था और दूसरा उसका दिलफेंक अंदाज़ की वह सभी दोस्तों की जान था।  हेमा ठाकुर को उसकी खूबसूरती की वजह से मिसेस फ्रेशर चुना गया और अब बारी थी असाइनमेंट्स की।  पता नहीं कैसे और कब राकेश और हेमा एक दूसरे के इतने करीब आ गए की हम सब से बहोत दूर हो गए।  कॉलेज पास किये हुए ५ साल बीत चुके है और हाल ही में हम सब की मुलाकात कनवोकेशन के दौरान हुई। राकेश सरकारी स्कूल में अंग्रेजी का मास्टर बन चूका है और हेमा के बारे  पूछने पर पता चला की हेमा की शादी हो चुकी है।  सभी दोस्त रोजी रोटी की लड़ाई में सहादत देने को  तैयार बैठे हैं।  बहोत दबाब देने पर राकेश ने बोला की चल यार सुट्टा पिए हुए काफी दिन हो गए है।  कनवोकेशन हॉल से बाहर निकल कर सूरज की चाय दूकान पर कदम अपने आप बढ़ गए।  गोल्ड फ्लैक के लच्छो के बिच राकेश, सुरेंद्र, राजगीर, पवन,  और मैं मोहन बात चित में मशगूल हो गए।  राकेश ने बताया की हेमा अपने ससुराल में खुस नहीं है और उसने अपने पति को सब बता दिया है।  उसके पति का नाम मयूर है और एक दिन मयूर ने राकेश को फोन भी किया था।   दोनों की कहा सुनी हो गई और मयूर अब हेमा को तलाक देना चाहता है।  राकेश की माँ और पापा उसकी शादी कही और ठीक कर चुके है और राकेश भी हेमा से कोई तालुकात नहीं रखना चाहता है।  बात चित करते हुए काफी समय हो चूका था और जाते हुए राकेश  ने एक बार फिर सबको हैरत में दाल दिया।  उसकी शादी 07 जुलाई को फिक्स हो   चुकी  है उसने हम सभी को शादी का कार्ड दिया।  आज 07 जुलाई है और पवन ने  मुझे फोन किया की सभी कुरता पैजामा में बाराती जायेंगे।  सब खुश है और बारात आ चुकी है लेकिन आज बात कुछ और है आज मुझे हिचकी आ रही है।  काश ये हिचकी राकेश को भी आती हेमा को भी आती।  प्यार करना गुनाह नहीं है इसको छिपाना गुनाह है।  हेमा और मयूर सब जगह दिख जाते है।  यहाँ सब चलता है हिचकी बस चन्द पानी की घुंटो से दूर हो सकती है।   

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