Sunday, 23 June 2019

लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप



रवि के चाचा रांची के एक बारे हॉस्पिटल में डॉक्टर थे और गर्मियों के छुट्टी में वह अक्सर चाचा से मिलने रांची जाया करता था।  इस साल भी छुट्टिया पर चुकी थी और रवि विजय रोडवेज के सीट पर बैठ कर सोच रहा था की रांची में इस साल गर्मिया बहोत ज्यादा पर रही है।  बस खुलने में अभी १ घंटा और है और रवि की निगाह अचानक से बजरंगी पान वाले पे परती है और वह सिगरेट पिने के लिए बस से निचे उतरता है।  इसी बिच उस के सीट पर एक खूबसूरत लड़की आ कर बैठ जाती है।  रवि सिगरेट जल्दी से ख़त्म कर बस की और चल परता है।   वह कहता है की वह सीट उसकी है और दोनों अगल बगल अपनी अपनी सीट पर बैठ जाते है।  बात चित के दौरान पता चलता है की लड़की का नाम रूचि है और वह अपने मां के यहाँ जा रही है।  रवि का मिलनसार स्वभाव और रूचि की हाजिरजवाबी सफर को सुहाना बना रही है।  पहाड़ी रास्ता ठंढी हवा और सुहाना सफर विजय रोडवेज की शान बढ़ा रही है।  रात कैसे बीत गई पता ही नहीं चला अब सुबह का समय है और बस रांची पहोच चुकी है।  सभी अपने अपने मंजिल की तरफ निकल पार्टी है।  रवि ने रूचि का मोबाइल नंबर ले लिया है और वह अपने चाचा से मिलने जा रहा है।  चाचा से मिलने की ख़ुशी से ज्यादा ख़ुशी उसे रूचि के मोबाइल नंबर मिलने से हो रही है।  अपने मोबाइल को  सहलाते रवि मोराबादी मैदान पहोच जाता है जहा उसके चाचा रहते है। नाहा धोकर रवि अपना व्हाट्स एप्प चेक करता है जिसमे पहले से ही रूचि की कई साडी मैसेज उसे मिलती है और वह पूरा दिन उसी में बिता देता है।  धीरे धीरे बात चित दोस्ती में और दोस्ती प्यार में बदल जाती है।  दोनों इस प्यार से अनजान है बस दोनों को एक दूसरे के साथ  आ रहा होता है और सबसे मजे की बात तो ये है की दोनों मधुबनी के ही है।  रांची में छुट्टियां बिताने के बाद रवि वापस आ जाता है है और रूचि भी कुछ दिनों में मधुबानी आ जाती है।  दोनों में यहाँ  भी मेल जोल सुरु हो जाता है और अचानक एक दरार जन्म लेती है जब  नौकरी का ऑफर आता है।  रवि यह ऑफर ठुकरा नहीं सकता क्यों की बरी मुश्किल से उसे यह नौकरी मिली है।  रवि अपने दोस्त नंदन से मिलता है और उसे इस नौकरी के बारे में बताता है नंदन भी उसे इस नौकरी को करने की सलाह  देता है।  रवि की पहली पोस्टिंग मोतिहारी होती है और वह जाने से पहले रूचि से मिलता है और अनमने मन से उसे छोड़कर मोतिहारी के लिए निकलता है।  मोतिहारी एक अच्छी जगह है लेकिन रवि का मन वहां  नहीं लगता  है।  हर एक दिन वह रूचि को मैसेज करता है फ़ोन करता है मगर रूचि उस से ठीक से बात नहीं करती और एक दिन रूचि ने रवि से फोन पर कहा "आई डोंट बिलीव इन लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप रवि "उस दिन से रवि और बेचैन हो गया और वह सोचने लगा की उस से क्या गलती हो गई है रूचि का व्यव्यहार क्यों बदल गया है।  अब लगभग एक साल बीत चुके है और रवि अपनी नौकरी में मगन हो  चूका है।  वो रूचि को अब तक नहीं भुला है और उस के मन में वो बात गूंजती रहती है - आई डोंट बिलीव इन लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप रवि।  उसने यह बात किसी को  नहीं बताई थी मगर नंदन को यह पता चल गया।  नंदन M.A में दाखिला लेने के लिए यूनिवर्सिटी पहोचता है और वहां उसे रूचि मिलती है।  नंदन रूचि को पहचानता है लेकिन रूचि उसे नहीं पहचानती।  दोनों का दाखिला M.A में हो जाता है और दोनों क्लास जाने लगते है।  धीरे धीरे नंदन रूचि से नजदीकियां बढ़ाता है और रूचि उसे भी पसंद करने लगती है।  मिलने जुलने का सिलसिला फिर सुरु हो जाता है।  अब रवि की छुट्टिया सुरु हो गई है और रवि घर आता है।  वह शाम को नंदन से मिलने जाता है लेकिन रूचि वहां  मिलती है। रूचि को देख कर वह नंदन से बिना मिले चला जाता है।  रूचि उसे पहचान नहीं पाती है क्यों की उसे उम्मीद नहीं थी की नंदन और रवि दोस्त है।  रवि को बहोत बुरा लगता है की उसका दोस्त रूचि के साथ क्या कर रहा है।  इसी उधेरबुन में रवि विजय रोडवेज की बस पाकर लेता है।  वह अपने चाचा से मिलने रांची जा रहा है।  बगल वाली सीट को वो ऐसे देखता है जैसे की कोई पुरानी  याद उसे सता रही हो।  अनायास ही उस के आँखों से आंसू बह निकलते है और वह नंदन को याद कर रहा है।  उसने सुना था की दोस्ती के बिच लड़की दरार पैदा करती है लेकिन आज उसे इस बात का एहसास हो जाता है।  आसुओं को पोछते हुए उसकी नजर बजरंगी पान वाले से लारती है और ऐसी हालत में उसे सिगरेट पीने की तीव्र इच्छा होती है।  वह बस से उतरता है क्यों की बस को जाते में अभी समय है।  सिगरेट पीते हुए उसे रूचि नहीं फिर से नंदन की याद आती है की कैसे कैसे लम्हो में दोनों ने एक दूसरे का साथ दिया था।  उस के मन में एक गाना चल रहा है- "एक चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते है लोग"।  बुझे मन से रवि बस में वापस बैठता है।  इधर नंदन और रूचि की कहानी बहोत आगे बढ़ जाती है।  दोनों के दिल और जिस्म कब एक हो जाते है पता नई नहीं चलता।  नंदन एक तेजस्वी लड़का है और उसे दोस्तों  की कमी नहीं है। उसके जिंदगी में एक और लड़की है जिसका नाम गुमनाम है लेकिन नंदन उसे बहोत प्यार करता है। नंदन अब रूचि से मिलना  जुलना कम  कर देता है।  नौकरी के सिलसिले में वह भी दिल्ली चला जाता है।  स्टेशन पे रूचि उसे छोड़ने आई है और जाते जाते वह कहती है की नंदन मुझे भूल मत  जाना। रेलगारी स्टेशन से छूट रही है रूचि की पकड़  नंदन से ढीली परती जा रही है।  रूचि स्टेशन से बाहर निकलती है और उसके मोबाइल पर मैसेज आता है -  आई डोंट बिलीव इन लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप रूचि। हो सके तो मुझे भूल जाना - नंदन।  रूचि ये पढ़ते ही बेहोश होने लगती है।  पास परे बेंच पर जैसे ही वह बैठती है की उसे रवि का चेहरा दिखाई देता है जो की अब उसकी जिंदगी से काफी दूर जा चूका है।  

हिचकी एक प्रेम कथा

कॉलेज के उन दिनों की बात  है जब सारे दोस्त एक साथ क्लास बंक किया करते थे और कैंटीन के समोसे चटनी किसी अमृत से कम  नहीं लगते थे। कॉलेज के हर डिपार्टमेंट में पढाई कम  और गप्पे ज्यादा चलते थे।  लड़कियों के बिच लड़के और लडको  के बिच लडकिया ग्रुप की शान बढ़ाया करते थे।  हर क्लास के बाद सुट्टे पे सुट्टो का दौर और उस के बाद कोल्ड ड्रिंक्स की ठंढक और ऊपर से रजनीगंधा और तुलसी की मादक खुसबू से शाम जवान हुआ करती थी।  कौन अमीर  और कौन गरीब सब के बटुए एक साथ खुला करते थे साहब वो दौर ही अलग था।  कॉलेज के सीढ़ियों पे लगता था की पांच सितारा होटल फेल है।  इन सबके बिच हमारा जिगरी दोस्त राकेश एंट्री लेता है और यही से शुरुआत होती है एक अनोखी प्रेम कथा की।  फर्स्ट ईयर के एडमिशंस चल रहे थे और नए नए चेहरे कॉलेज की शान बढ़ा रहे थे।  तभी एंट्री होती है एक ऐसी लड़की की जो खूबसूरती के मामले में चाँद सितारे तक की गोटिया लाल कर दे। एक तरफ इंग्लिश ऑनर्स का थर्ड ईयर बैच और दूसरी तरफ फ्रेशर्स।   
 राकेश  हमारे ग्रुप का सबसे होनहार विद्यार्थी था और कॉलेज का पहला लौंडा था जिसने दोनों साल मिलाकर 60 % मार्क्स लाये थे।  अंग्रेजी साहित्य में नंबर लाना कोई मजाक नहीं था।  यह एक कारण था और दूसरा उसका दिलफेंक अंदाज़ की वह सभी दोस्तों की जान था।  हेमा ठाकुर को उसकी खूबसूरती की वजह से मिसेस फ्रेशर चुना गया और अब बारी थी असाइनमेंट्स की।  पता नहीं कैसे और कब राकेश और हेमा एक दूसरे के इतने करीब आ गए की हम सब से बहोत दूर हो गए।  कॉलेज पास किये हुए ५ साल बीत चुके है और हाल ही में हम सब की मुलाकात कनवोकेशन के दौरान हुई। राकेश सरकारी स्कूल में अंग्रेजी का मास्टर बन चूका है और हेमा के बारे  पूछने पर पता चला की हेमा की शादी हो चुकी है।  सभी दोस्त रोजी रोटी की लड़ाई में सहादत देने को  तैयार बैठे हैं।  बहोत दबाब देने पर राकेश ने बोला की चल यार सुट्टा पिए हुए काफी दिन हो गए है।  कनवोकेशन हॉल से बाहर निकल कर सूरज की चाय दूकान पर कदम अपने आप बढ़ गए।  गोल्ड फ्लैक के लच्छो के बिच राकेश, सुरेंद्र, राजगीर, पवन,  और मैं मोहन बात चित में मशगूल हो गए।  राकेश ने बताया की हेमा अपने ससुराल में खुस नहीं है और उसने अपने पति को सब बता दिया है।  उसके पति का नाम मयूर है और एक दिन मयूर ने राकेश को फोन भी किया था।   दोनों की कहा सुनी हो गई और मयूर अब हेमा को तलाक देना चाहता है।  राकेश की माँ और पापा उसकी शादी कही और ठीक कर चुके है और राकेश भी हेमा से कोई तालुकात नहीं रखना चाहता है।  बात चित करते हुए काफी समय हो चूका था और जाते हुए राकेश  ने एक बार फिर सबको हैरत में दाल दिया।  उसकी शादी 07 जुलाई को फिक्स हो   चुकी  है उसने हम सभी को शादी का कार्ड दिया।  आज 07 जुलाई है और पवन ने  मुझे फोन किया की सभी कुरता पैजामा में बाराती जायेंगे।  सब खुश है और बारात आ चुकी है लेकिन आज बात कुछ और है आज मुझे हिचकी आ रही है।  काश ये हिचकी राकेश को भी आती हेमा को भी आती।  प्यार करना गुनाह नहीं है इसको छिपाना गुनाह है।  हेमा और मयूर सब जगह दिख जाते है।  यहाँ सब चलता है हिचकी बस चन्द पानी की घुंटो से दूर हो सकती है।